दिल्ली में आजकल एक अजीब से माहौल बनाया गया है, कुछ लोग दिल्ली के शाहीनबाग में हाइवेके बीचोबीच बैठकर लगभग 50 दिन से धरना दे रहे हैं ये कहकर कि वो भारत सरकार द्वारा पारित कानून नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एक अदृश्य कानून राष्ट्रीय नागरिकता लेखा (NRC) का विरोध कर रहे हैं ! इस प्रदर्शन पर राजनीतिक विश्लेषक श्याम दुबे का एक विश्लेषण:
NRC को अदृश्य इसलिए क्योंकि भारत सरकार द्वारा ना तो अभी इस बिल की रूपरेखा तैयार की गयी है और ना ही इसके शर्तों की कोई अधिकृत घोषणा की गयी है, लेकिन एक गुट विशेष इसके नियम व शर्तों को स्वयं के अनुसार परिभाषित कर देश की जनता को इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बता रहा है ।
लेकिन इस प्रदर्शन के तरीके और समय देखकर कुछ सवालों का खड़ा होना स्वाभाविक है
सवाल ये है कि क्या सड़कों पर बैठे ये लोग अपारित कानून की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं ?
सवाल ये कि CAA जिसके अनुसार 3 मुस्लिम देशों के निश्चित तारीख से पहले भारत में शरण ले चुके पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने से क्या किसी भारतीय की नागरिकता का कोई लेना देना है ?
सवाल ये कि इतने बड़े मंच बनाकर वहां भोजन रहने की व्यवस्था 50 दिनों से कौन और क्यों कर रहा है ?
सवाल ये कि एक मुख्य सड़क को बन्द कर किसी भी प्रकार का आन्दोलन कहाँ से संवैधानिक है ?
सवाल ये कि भारत के मध्य में चल रहे इस आन्दोलन में भारत के दुश्मन देश को इतनी रुचि क्यों है ?
सवाल ये कि महीनों से कड़ाके की ठंड में सड़कों पर बैठे, बेरोजगारी का रोना रो रहे लोगों के घर में खर्च कैसे चल रहा है ?
सवाल ये कि चुनावों के बीच ही ये सारे आन्दोलन क्यों, और राजनैतिक पार्टियों का इतना समर्थन क्यों प्राप्त है ?
सवाल ये कि भारत के टुकड़े और संविधान से आजादी के नारे लगाने वालों का समर्थन इस आंदोलन से क्यों हो रहा है ?

अब मुख्य सवाल ये उठता है कि 8 फरवरी 2020 में दिल्ली विधानसभाके चुनाव हैं और नियमानुसार 6 फरवरी 2020 की शाम से पूरी दिल्ली में आदर्श आचार संहिता लागू हो जायेगी और धारा 144 लागू हो जायेगी, तो क्या ये आन्दोलन तब भी कानून का उल्लंघन करते हुये चलता रहेगा ? या देश के कानून का सम्मान करते हुये आन्दोलन को पूर्णविराम दिया जायेगा ! या फिर चुनाव आयोग कानून का प्रयोग कर इस आन्दोलन को खत्म करवायेगा !!
क्या इस आन्दोलन की अवधि अब मात्र 2 दिन राह गयी है ?
उत्तर स्वयं से पूछे या समय ओर छोड़ दें, परंतु इतना तो अवश्य कहूंगा कि देश में अस्थिरता फैलाने वाली किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं किया जा सकता ।
जय हिन्द, वंदे मातरम
भारत माता की जय