जब देश जाहिलियत सर्वव्याप्त हो अपनी सीमायें पार करने लगे
तो देश का संभावित भविष्य चिंतित करने लगता है – श्याम दुबे
एक तरफ एक कौम है जिसमें अधिकतर जाहिलियत इस कदर भर दी गयी है कि जिस मिट्टी में पैदा हुये आज उसी मिट्टी के गद्दार बनें फिर रहे हैं, तो दूसरी तरफ देश की नीति नियंता और पूर्व नीति नियंता राजनीतिक पार्टियों के चमचे और अंधभक्त हैं जो जुड़े तो मुख्य धारा से हैं परंतु उन्हें स्वयं नहीं पता कि उनका नियंत्रण कौन कर रहा है ।
देश की मुख्य राजधानी दिल्ली में एक प्रायोजित दंगा हुआ, कई चरणों में इसकी तैयारी को समझा जा सकता है, इसके विरोध में भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे दी और दंगाइयों ने इस बयान को भुना कर एक भीषण नरसंहार को अंजाम दे डाला ।
इसके ऊपर भाजपा के ही सांसद पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी गौतम गंभीर का एक बयान आता है कि दंगाई कोई भी हो बख्सा नहीं जाना चाहिये, चाहे वो कपिल मिश्रा हों या कोई और।
लेकिन भाजपा के ही अंधभक्त अब गौतम गंभीर के दुश्मन बन बैठे, आखिर क्या गलत कह दिया गौतम गंभीर ने !
देश निश्चित रूप से कॉंग्रेस और आप पार्टी के विचारों से त्रस्त है, परंतु आंखें बंद करके भाजपा का समर्थन भी क्या सही है ?
लोगों को यह नहीं दिखा की गौतम गंभीर के रूप में एक ऐसा राजनीतिज्ञ इस देश की राजनीति में प्रवेश कर रहा है जो राजनीतिक तिकड़मों से वास्ता नहीं रखता है, उन्होंने एक बार भी नहीं कहा कि कपिल मिश्रा को गिरफ्तार करो, उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि दंगाई जो भी हो वो गिरफ्तार हो, फिर क्या वजह है कि भाजपा का ही एक धड़ा गौतम गंभीर के पीछे पड़ गया ।
मानता हूं कपिल मिश्रा दिल्ली की स्थिति के जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन अगर होते तो क्या कपिल मिश्रा को सिर्फ कट्टर कांग्रेस या आम आदमी पार्टी विरोधी होने के कारण दंगों की छूट होती ?
दंगों में मारे गए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल, IB अधिकारी अंकित शर्मा की मौत के लिये क्या किसी को भी क्षमा किया जा सकता है ?
इसमें किसी भी नेता के परिवार वाले नहीं मारे गये, न तो केजरीवाल, या गांधी परिवार या अमानतुल्ला न ही कपिल मिश्रा के परिवार के, फिर क्या वजह है कि बिना बयान को समझे देश को अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाने वाले एक खिलाड़ी के बयानों को तोड़ मरोड़कर उसे निशाना बनाया जा रहा है ।
कपिल मिश्रा या किसी भी पार्टी के नेता ने देश को वो सम्मान नहीं दिलवाया है जो गौतम गंभीर ने दिलवाया है, फिर एक विचारधारा को देश पर थोपने की कोशिश करने वाले लोग अब अपनी मर्जी से देश चलाएंगे क्या !
मैं कपिल मिश्रा का विरोधी नहीं लेकिन गौतम गंभीर के बयान के समर्थन में खुलकर उनके साथ हूँ, और ये मानता हूं कि देश को किसी भी विचारधारा के द्वारा हाईजैक नहीं किया जाना चाहिये !
दंगाई कोई भी हो एनकाउंटर कर दिया जाना चहिये ।
जय हिंद